An interview with Bhawani Singh 'Bhavuk'

Book Name - "Binjara-ri-beladi"
Hobbies and Interests – Singing, Writing, Painting, Traveling, Reading.
Biographical Information - I m belonging from rajpoot medile class family.my childhood was amazing. Life Moto - I want to give good things to everybody
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Q1. आपने अपने विशेष क्षेत्र या शैली में लिखना क्यों चुना? यदि आप एक से अधिक शैली में लिखते हैं, तो आप उन्हें कैसे संतुलित करते हैं

Ans : मेरे लेखन का क्षेत्र राजस्थानी भाषा में ही रहा,हाँ कभी कभार मैने हिन्दी में भी लिखा है।ज्यादातर मेरा लेखन राजस्थानी में ही हुआ है।खासकर दोहा,सोरठा,कवित,घनाक्षरी इत्यादी छंदों में लेखन की ही प्रधानता रही।काव्य के अतिरिक्त राजस्थानी भाषा में यात्रा वृतांत भी लिखे है। इसका मुख्य कारण मेरा मातृभाषा के प्रति अगाध लगाव होना है।दूसरा कारण,राजस्थानी काव्य परंपरा में वयन सगाई अलंकार की उपस्थिति है,जो हिन्दी में अनिवार्य नहीं है।

Q2. आपकी किताबों / कहानी / पढ़ने / लिखने / आदि का प्यार कहाँ था? से आते हैं? आप कब से लिख रहे हैं? और आप किस तरह का लेखन करते हैं?

Ans: पढ़ने की अभिरूचि बचपन से ही थी,कोर्स की किताबों के अलावा मैं पुस्तकालय में जाकर विभिन्न पत्र पत्रिकाएं पढ़ता था,हिन्दी और राजस्थानी साहित्य की पुस्तके पढ़ना मेरा शगल था। हाईस्कूल पास करने के बाद मैंने लेखन प्रारंभ किया लेकिन यदा-कदा ही लिखता था।सदैव नहीं।

Q3. आप लेखन / पठन / कहानी / लेखन आदि में क्या सांस्कृतिक मूल्य देखते हैं?

Ans: जी हाँ,सदसाहित्य ही हमारी साँस्कृतिक धरोहर है।हमारे साहित्य मैं मानव जीवन के सभी सद नियम उल्लेखित है।

Q4. इस पुस्तक में आपके लक्ष्य और इरादे क्या थे, और आप उन्हें कितना अच्छा महसूस करते हैं?

Ans: 'बिणजारा री बेलड़ी' पुस्तक में मैनें राजस्थानी साहित्य,इतिहास,लोकदेवता,लोकजीवन के रंग,ग्रामीण परिवेश का चित्रण,काव्य विधाओं में करने का प्रयास किया है। मैं इसमें अस्सी प्रतिशत सफल हुआ।ऐसा मेरा मानना है।बाकी सही मुल्यांकन तो सुधि पाठक ही करेंगे।

Q5. आपको क्या लगता है कि आपके लेखन में सबसे अधिक विशेषता है? और इस पुस्तक को लिखने का सबसे कठिन हिस्सा?

Ans: काव्य विधाओं को सीखना बहुत कठिन महसूस हुआ,लेकिन दृढ़ निश्चय और मेरे आदरणीय गुरूजनों के सत् प्रयास से यह सब सुगम हुआ। व्याकरण और भाषागत अशुद्धियों का संशोधन मेरे लिए बहुत कठिन था। अंततः मैनें वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय श्री नारायणसिंह राठौड़ 'पीथल' से निवेदन किया और उन्होने मेरी पूरे मन से सहायता की और मार्गदर्शन किया।

Q6. आपको लिखना सीखने में सबसे उपयोगी क्या लगा? क्या कम से कम उपयोगी या सबसे विनाशकारी था?

Ans: सबसे आसान सोरठे लिखना लगा।क्यूँकि सोरठा दोहे का उल्टा होता है। और दोहा लिखना सीखने में मुझे पूरे तीन महिने लगे थे जो बड़ा ही दुश्कर कार्य था। जब दोहा सीख गया तो सोरठा आसान लगा,रोमकंद छंद,घनाक्षरी,मुक्तक और कुंडलियां छंद मुझे आनंददायक लगे।

Q7. क्या आप पूर्णकालिक या अंशकालिक लेखक हैं? यह आपके लेखन को कैसे प्रभावित करता है?

Ans: मैं अंशकालिक लेखक हूँ।जब भी खाली समय होता है।कुछ ना कुछ लिख लेता हूँ। कविता हृदय से प्रकट होती है।इसे वातावरण बहुत प्रभावित करता है। बिना सही वातावरण के आप एक शब्द भी नहीं लिख सकते।अगर वातावरण अनुकूल हो तो आप एक शब्द से शुरू करेंगे और चंद मिनिटों में पूरी कविता कागज पर साकार होगी।

Q8. आप कैसे लिखते हैं या लिखने के लिए समय निकालते हैं?

Ans: जब भी मानस हुआ लिख लेता हूँ।कभी कभार दैनिक व्यस्तताओं के चलते कई कई दिनों तक नहीं लिख सकता।

Q9. लेखन समुदाय में आपकी क्या भूमिका है?

Ans: नवोदित ,प्रशिक्षकु।

Q10. भविष्य की परियोजनाओं के लिए आपकी योजनाओं में क्या शामिल है?

Ans: यात्रा संस्मरण लिखना,राजस्थानी कहानी संग्रह,हिन्दी काव्य संग्रह।


Thank you very much for taking the time out of your busy schedule to take part in this interview.
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