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सिद्धार्थ सिन्हा

सिद्धार्थ सिन्हा

प्रश्न 1 :- आपने अपने विशेष क्षेत्र या शैली में लिखना क्यों चुना?
उत्तर :- स्वभाव से मैं अन्तर्मुखी हूँ। अपने आसपास के परिवेश और देश-दुनिया में घटित होती घटनाएँ मुझे लिखने पर विवश करती हैं। घटनाओं पर सोचकर उसपर विश्लेषण करना मेरी आदत है जो शब्दों कविता के रूप में व्यक्त होती रहती है।

प्रश्न 2 :- आप कब से लिख रहे हैं? और आप किस तरह का लेखन करते हैं?
उत्तर :- लेखन की शुरुआत मैंने 15 की उम्र से समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में पत्र लेखन से की थी। पत्र लेखन से शुरू हुई अभिव्यक्ति धीरे-धीरे कविता का रूप लेने लगी। कविता और कहानी मेरी प्रिय विधा हैं। इसके अतिरिक्त लेख,गज़ल एवं कविताओं पर भी मेरी कलम आसानी से चलती है।

प्रश्न 3 :- लेखन आपके लिए कितना सहज है और इस पर आपकी व्यक्तिगत राय क्या है ?
उत्तर :- दुनिया में हर इंसान के पास कहने को कम से कम एक कविता अवश्य होती है पर इस कविता को शब्दों का श्रृंगार कर पेश करने का हुनर सभी के पास नहीं होता । सच कहूँ तो कविता लिखने के लिए मुझे काफी सोचना या परिश्रम नहीं पड़ता है । जीवन में देखी, सुनी और घटित कोई भी संवेदनशील बात मेरे लेखन का विषय बनकर कविता के रूप में व्यक्त हो जाती है । किसी अत्यन्त अहम मुद्दे पर कविता लिखना थोड़ा मुश्किल जरुर होता है क्योंकि एक कवि के रूप में सभी पात्रों के साथ न्याय करते हुए पाठकों को घटना का एक समाधान भी देना होता है !

प्रश्न 4 :- इस पुस्तक में आपके लक्ष्य और इरादे क्या थे, और आप उन्हें कितना अच्छा महसूस करते हैं?
उत्तर :- किस्सा -ऐ -सुट्टा से मैंने नशा मुक्ति का लक्ष्य बनाया था और उसमे लगातार मुझे सफलता भी मिल रही है किताब मे धूम्रपान संबंधित धारणाएं; पवित्र और पापी, परिष्कृत और गलत, रामबाण दवा और स्वास्थ्य के लिए घातक खतरा, समय तथा स्थान के साथ कैसे बदलती रहती हैं। उस सन्दर्भ मे प्रकाश डाला गया है! और अपेक्षाकृत हाल ही में ही भारत में मुख्य रूप से, धूम्रपान को नकारात्मक रूप से देखा जाने लगा है तो यह देखकर मुझे प्रसन्ता भी होती है |

प्रश्न 5 :- साहित्य को आप अपने तरीके से कैसे परिभाषित करते हैं?
उत्तर :- साहित्य की सार्थकता तभी होती है जब वह व्यक्ति, समाज, देश और दुनिया को एक नई दिशा प्रदान करे। अच्छा साहित्य केवल मनोरंजन के लिए नहीं होता है अपितु इससे जीने की राह मिलती है। जो भावनाएँ बोलकर व्यक्त नहीं की जा सकती वह शब्दों के रूप में आसानी से कही जा सकती हैं।

प्रश्न 6 :- आपको लिखना सीखने में सबसे उपयोगी क्या लगा?
उत्तर :- मै कुछ भी लिखने के पहले ज्यादा से ज्यादा उस सम्बन्ध मे पढ़ने की कोशिश करता हूँ आमतौर पर मै 2 से 4 घंटे प्रतिदिन लाइब्रेरी या फिर घर मे पढ़ता हूँ जिससे मुझे लिखने मे काफ़ी मदद मिलती है !

प्रश्न 7 :- क्या आप पूर्णकालिक या अंशकालिक लेखक हैं? यह आपके लेखन को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर :- मुझे अंशकालिक लेखक कहना ही उचित होगा क्योंकि मुझे लेखन के साथ साथ नौकरी पर भी ध्यान देना होता है! शायरी कविता अगर किसी व्यक्ति के अंदर है तो उसको पॉलिस किया जा सकता है किन्तु उसे सीखाया नहीं जा सकता है ये मेरा मानना है इसलिए कभी भी ये मुझे प्रभावित नहीं करता है अंशकालिक होने के बावजूद भी मुझे लेखन मे कोई समस्या नहीं होती है !

प्रश्न 8 :- आप कैसे लिखते हैं या लिखने के लिए समय कैसे निकालते हैं?
उत्तर :- मै सामान्यतौर पर अपने मोबाइल मे ही कविता, गज़ल और कहानियाँ लिखा करता हूँ आपको बता दूं की मेरी पहली किताब किस्सा -ऐ -सुट्टा भी पूरी मोबाइल पर ही लिखी गई थी जिस कारण मुझे ऑफिस के बाद लिखने मे काफ़ी सहूलियत होती है और समय निकलने मे ज्यादा दिक्कत नहीं होती है !

प्रश्न 9 :- लेखन के अलावा आपके शौक में और क्या-क्या शुमार है?
उत्तर :- लेखन के अतिरिक्त मुझे पेड़-पौधों से प्यार है लेकिन यह बात और है कि मैं अपनी इस शौक के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाता। इसके साथ साथ मुझे योगा, जिम करना पुराने हिन्दी गाने सुनना भी मुझे बेहद पसन्द है। मैं जब कोई रोमान्टिक कविता लिख रहा होता हूँ तो पुराने हिन्दी रोमान्टिक गाने मेरे कमरे में गूंज रहे होते हैं।

प्रश्न 10 :- भविष्य की परियोजनाओं के लिए आपकी योजनाओं में क्या शामिल है?
उत्तर :- किस्सा -ऐ -सुट्टा की सफलता के बाद मेरी हमेशा से ही योजना समाज मे फैली कुरीतियों, बुराइयों और सामाजिक पहलू को लेकर ही रहेगी फिलहाल मैं कुछ कहानियाँ लिख रहा हूँ जो जल्द ही आप तक पहुंचेगी !

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Sateesh gupta
Siddharth Sinha

Keep it up

Very nice

4 months ago
Siddharth sinha
Siddharth Sinha

Excellent work by writer

Kissa -e-sutta is a great work by young writer

2 months ago

Review सिद्धार्थ सिन्हा.

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