Interview With Virendra Sinha

Interview With Virendra Sinha

Deepak : आपको पहली बार कब एहसास हुआ कि आप एक लेखक बनना चाहते हैं?
Virendra Sinha :- स्नातकोपरांत ही मुझे लगने लगा था कि मैं भी लिख सकता हूँ, बस कर दी शुरुवात अपनी शेरो शायरी से।

Deepak : आपको किताब लिखने में कितना समय लगता है ?
Virendra Sinha : यह किताब के पन्नों की संख्या पर निर्भर है कि उसे लिखने में कितना समय लगेगा। हाँ औसत रूप से 175 पृष्ठों की किताब में लगभग 3-4 माह में पूरी कर सकता हूँ।

Deepak : जब आप लिख रहे होते हैं तो आपका कार्यसूची कैसा होता है?
Virendra Sinha : सुबह 7 से 11 और रात को 9से 11 बजे तक मैं लिखता हूँ। दिन के समय मैं कोर्ट में व्यस्त रहता हूँ। रविवार को थोड़ा और समय लिखता हूँ।

Deepak : आप क्या कहेंगे आपका दिलचस्प के बारे में ?
Virendra Sinha : शेरोशायरी में दिलचस्पी का श्रेय मेरे मातापिता को जाता है जिन्होंने मुझे ये मौहाल दिया, उर्दू के अल्फ़ाज़ दिए।

Deepak : आपको अपनी पुस्तकों के लिए आपकी जानकारी या विचार कहाँ से मिलते है हैं?
Virendra Sinha : विभिन अनुभवों से, व्यवहारों से, घटनाओं से, कल्पनाओं से, ही ख़्यालात पैदा होते हैं।

Deepak : आपने अपनी पहली किताब कब लिखी थी और आप कितने साल के थे?
Virendra Sinha : मैंने विभिन्न पत्रों में लिखा किंतु किताब के रूप में मेरा पहला संकलन इसी साल बुकस्क्लिनिक पब्लिशिंग ने प्रकाशित किया है। दूसरी पुस्तक भी सितंबर में प्रकाशित होगी।

Deepak : जब आप नही लिख रहे हैं तो आप क्या करना पसंद करते हैं?
Virendra Sinha : जब नहीं लिख रहा होता तो पढ़ता हूँ, सुनता हूँ, मुशायरे सुनता हूँ, इत्यादि।

Deepak : आपका परिवार आपके लेखन के बारे में क्या सोचता है?
Virendra Sinha : परिवार के लोग साथ तो देते हैं किंतु समय का आवंटन न्यायोचित मांगते हैं। इसलिए मैंने लिखने के लिए सिर्फ सुबह शाम का समय निश्चित किया है।

Deepak : आप अपनी किताबो को बनाने में सबसे आश्चययजनक चीजों में से एक क्या थी?
Virendra Sinha : मेरे पास 3 किताबों की सामग्री इकठी हो गई थी मैंने कभी छपवाने की सोची ही नहीं पर जबसे आधुनिक प्रिंटिंग का डिजिटल सिस्टम देखा तो छपाई का ध्यान आया।

Deepak : क्या आपके पास एक बेहतर लेखक बनने में मेरी मदद करने के लिए कोई सुझाव है? यदि ऐसा है, तो वो क्या हैं?
Virendra Sinha : लेखक में प्रकृति प्रदत्त प्रतिभा होनी चाहिए, हाँ उसे निखारा जा सकता है यदि हम ज़्यादा से ज़्यादा अध्ययन करें, भ्रमण करें, सामाजिक संबंध बनाते रहें आदि। इसके अलावा कोई गुरु भी बनाना पड़ता है।

Deepak : आपकी अगली पुस्तक कब लिख रहे हैं?
Virendra Sinha : मेरी अगली पुस्तक की सामग्री डिजिटल फ़ाइल में तैयार है, सितंबर में छपने को दे दूंगा।

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