Bodhisattva Avalokiteshvara Evam 22 Pratigyaon Vale Ambedkar by Swami Dhyan Jagdish

300.00

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : Hindi
  • Page : 190
  • Size : 5.5×8.5
  • ISBN-13 ‏ : ‎9789358236804
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years 
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

1 in stock (can be backordered)

SKU: book1762BCP Category:

Description

“””महामंगल-गाथा”” में किसी देवता विशेष का उल्लेख नहीं है। हमने अपनी संकीर्णता के कारण देवताओं को भी सम्प्रदायों में विभक्त कर रखा है। देवता किसी जाति या सम्प्रदाय से बंधे हुए भी नहीं हैं। हम ही उन्हें अपने सम्प्रदायों में बांधने का प्रयास कर कहे हैं।

देवताओं के माध्यम से जो ब्राह्मणों ने गठजोड़ करके व्यापार खड़ा कर रखा है, व इनके आधार पर जो आज राजनीति की जा रही है, बाबा साहेब ने इस गठजोड़ को तोड़ने का ही प्रयास किया है। इसलिए बाबा साहेब ने उन सभी हिन्दू देवी देवताओं को, जिनसे अनुसूचित वर्ग जुड़ा हुआ है, न मानने की अपील की है।

बाबा साहेब के सामने समस्या यह थी, कि यदि वे “”देवताओं”” को ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेते हैं, तो “”ब्राह्मण”” एवं उनके “”हिन्दुत्व”” को भी स्वीकार करना पड़ेगा। उन्हें यह भी शंका थी, कि बुद्ध का मार्ग ग्रहण करते वक्त इन देवताओं का मानना जारी रह सकता है। इसलिए उन्हें एक सिरे से सब को नकारना पड़ा।
क्यों ? क्योंकि देवी देवता अब हिन्दुत्व की पहचान बन चुके हैं। इसलिए उन्हें दोनों को ही अस्वीकार करना पड़ा। उन्हें सामाजिक नजरिये के कारण ऐसा करना पड़ा है। यह एक तकनिकी पहलु से जुड़ा हुआ मुद्दा है। मैं इस पहलु को इसी ढंग से समझ पा रहा हूं।
नहीं तो बताइये जब “”महामंगल-गाथा”” में “”बुद्ध”” के साथ “”देवताओं”” से भी रक्षा करने की विनती की गई है, तब बाबा साहेब देवताओं के अस्तित्व को कैसे अस्वीकार कर देगें ?
इसके अतिरिक्त देवताओं के अस्तित्व को स्वीकार करने के अन्य कारण भी हैं। अनेकों ऐसी “”गाथाएं”” एवं “”सुत्त”” हैं, जिनमें देवताओं का उल्लेख है। जिसमें आवाह्न गाथा, महामंगलं सुत्त, करणीयमेत्त सुत्त, आशीर्वाद गाथा, बिब्ब प्रतिठा स्थापना, पुण्यानुमोदन सुत्त शामिल हैं।
सबसे बड़ी बात यह है, कि “”धम्मपद”” जो कि विश्व प्रसिद्ध ग्रंथ है, में भी अनेकों जगह देवताओं का जिक्र आया है। विश्व बौद्ध जगत में किसी कोने से आज तक यह नहीं सुना गया है, धम्मपद या ग्रंथों में जो देवताओं का जिक्र आया है, वह कपोल कल्पित है। न किसी ने यह कहा है, कि देवताओं को स्वीकारना, अंधविश्वास को स्वीकारना है। इस विषय में भारत के बौद्ध ही यह भ्रम पालकर उपहास के पात्र बन रहे हैं।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है, कि बाबा साहेब देवताओं के अस्तित्व को अस्वीकार करके नहीं चल रहे हैं।
जो लोग तिपिटक में ब्राह्मणों द्वारा सम्मिश्रण की बात कर रहे हैं, वे बताएं कि तिपिटक केवल भारत में ही थे, जो उन्होंने इसमें उन्होंने सम्मिश्रण कर दिया है ? तिपिटक तो अन्य देशों में सुरक्षित थे। वे पूरे बौद्ध जगत में सम्मिश्रण कैसे कर सकते थे ?
भारत के बौद्ध अपने पूर्वाग्रह को साथ रखकर बुद्ध के मार्ग का अवलोकन कर रहे हैं। इनकी सोच ब्राह्मण विरोधी होने के कारण, जहां इनकी बुद्धि विषय की गहराई को जानने में असमर्थ रहती है, वहां बौद्ध ग्रंथों में अंधविश्वास घुसेड़ने का आरोप ब्राह्मणों पर डाल कर पल्ला झाड़ लेते हैं। इस विषय पर यह मेरा निजी नजरिया है। जरूरी नहीं है, सभी इस नजरिये से सहमत हों ? मैं तो इसी नजरिये को लेकर आगे बढ रहा हूं।”

Additional information

Dimensions 5.5 × 8.5 cm

Reviews

There are no reviews yet.

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.