Buddh Samaj Sudharak Nahin by Swami Dhyan Jagdish

195.00

“यथा भूत ज्ञान दर्शन”, यह है सत्य के मार्ग पर चलने का दर्शन। अर्थार्थ धर्म के मार्ग पर चलने का दर्शन। जो भी हमारे अन्दर और बाहर घटित हो रहा है, उसको पहले तटस्थ भाव से देखें। यानि उसका “दर्शन” करें। तटस्थ भाव से दर्शन करना ही “ज्ञान” बन जाता है। जिसे हम देखते हैं, वह पहले घटित (भूत) होता है। घटित होने के साथ साथ ही देखा जा सकता है। यहां तो हर क्षण घटित हो रहा है। घटना कोई अपने आप में स्वतंत्र घटना नहीं होती। यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है, जो हर क्षण घटित हो रही है। इस हर क्षण घटित होने वाली प्रक्रिया को सचेत होकर जानने हो ही बुद्ध का “क्षणिकवाद” कहा गया है। यह ज्ञान सोचने का मोहताज नहीं है। जब भी सोचा जाएगा, घटना घटित होने के बाद ही सोचा जाएगा। यह सोचना कल्पना मात्र ही होगी।”

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : Hindi
  • Page : 119
  • Size : 5.5×8.5
  • ISBN-13 ‏ : ‎9789355351357
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years 
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book
SKU: book1831BCP Category:

Additional information

Dimensions 5.5 × 8.5 cm

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