Chandrasen Viraat Tatha Brjesh Singh Ki Gazalon Mein Vyakt Samasaamayik Bodh by (Dr. Bhikaji Vhannappa Kamble)

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“””चंद्रसेन विराट तथा बृजेश सिंह की ग़ज़लों में व्यक्त समसामयिक बोध”” एक उच्च स्तरीय महत्वपूर्ण शोध प्रबंध है। इसमें समसामयिकता पर चिंतन मनन के साथ हिंदी ग़ज़ल क्षेत्र के अनेक विषयों की गहन चर्चा की गई है। चंद्रसेन विराट तथा बृजेश सिंह की ग़ज़लों में एक ओर जहाँ सामाजिक समस्याओं का वर्णन हुआ है, वहीं राजनीतिक, आर्थिक विसंगतियों पर भी करारा प्रहार किया गया है। साथ ही नारी, आम आदमी की पीड़ा को उन्होंने बखूबी रेखांकित किया है। चंद्रसेन विराट तथा बृजेश सिंह की ग़ज़ले संवेदना एवं शिल्प की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है। चंद्रसेन विराट तथा बृजेश सिंह का साहित्य संसार इतना व्यापक है कि इनकी रचनाधर्मिता पर कलम चलाना अत्यंत कठिन कार्य है। फिर भी इनकी रचनाओं का अध्ययन अत्यंत प्रामाणिकता से करने का प्रयास मैंने इस किताब के माध्यम से किया है। मुझे उम्मीद है कि चंद्रसेन विराट तथा बृजेश सिंह की ग़ज़लों का अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले अध्येताओं एवं अनुसंधाताओं के लिए यह ग्रंथ उपादेय सिद्ध होगा।
– डॉ. भिकाजी कांबळे”

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing (28 September 2022)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎ 231 pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355353627
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

“परिचय
डॉ. भिकाजी व्हन्नाप्पा कांबळे
जन्म :- 22 जून, 1985
शिक्षा :- एम. ए., बी. एड., एम. फिल., सेट, नेट, पीएच.डी. (हिंदी)
गतिविधियाँ :- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में संशोधनात्मक एवं आलोचनात्मक आलेख प्रकाशित।
संपर्क :- गांव / डाक :- तमदलगे,
तहसील :-शिरोळ,
जिला :- कोल्हापुर, महाराष्ट्र (416101)
घुमंतू :- 9970152685
ई-मेल :- bhikajikamble2217@gmail.com

Additional information

Dimensions 6 × 9 cm

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