Chhattisgarh Ke Aguva Beta by Mr. Bundram Jangde

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“अगुवा बेटा
अ गुवा बनव आगु रेंगव, बने सुमता मंढ़ालव भईया !
मुही पार ल बांधके चलव, झईन रहय कोनो फोरईया !!

गु मान छोड़ आगु बढ़व, इही हे मोर विनती अरजी !
इही आशा ले मोर कबिता बने हे, नई मानिहव तुंहर मरजी !!

वा स्तविक्ता झलकत हे, अगुवा बेटा के लिखे कबिता म !
पढ़व, पढ़ावव, जम्मो जुर मिलके, ले जावव आसमान म !!

बे टा बनव खॉंटी अगुवा, छोड़व कुरिती अंधबिष्वास ल !!
राज लावव छत्तीसगढ़ म, अउ जगावव आसपास ल !!

टा रदेवव जम्मो बैर बाषु अउ, जुन्ना – जुन्ना गोठ बात ल !
ओसरी पारी आगु बढव, अउ सब्बो देवव संग साथ ल !!”

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : Chhattisgarhi
  • Page : 182
  • Size : 5×8
  • ISBN-13 ‏ : ‎9789355359803
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years 
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

पचपेड़ी के रहइया श्री बुंदराम जांगड़े के काव्य संग्रह परकाशित होवत हे, बड़ खुशी के विषय आय। ये काव्य संग्रह मा 150 कविता सकलाय हवय। ये संग्रह मा खाल्हे मा लिखाये विशेषता ला पायेंव :-

1. श्री बुंदराम जाँगड़े ह “छत्तीसगढ़ के अगुवा बेटा” अपन उपनाम लिखथे। ये नाम ला सारथक करत, सतनामी मन ला आगू आ के अगुवई करे ला कहिथे-

जैसेः-
“छत्तीसगढ़ के अगुवा बेटा
सतनामी तोला जाने हँव।
सत खातिर तही लड़इया
महिमा तोर बखाने हैव।।”
(छत्तीसगढ़ के अगुवा बेटा)

2.सतनामी मन के इष्ट परमपूज्य बबा गुरू घासीदास के महत्तम ला अपन कविता मा लिखे हावयः-

देखवः-
’‘सतनाम के अमृतबानी बरसा दीये गुरु बबा ग मोर
देश-दुनिया म गुरु संदेश के, उड़त हावय शोर।।’’

(गुरु घासीदास बबा ल अक्षर नमन)

3.बुंदराम जांगड़े जी ह स्वयं एक स्वाभिमानी सतनामी आय। छ.ग. के इतिहास गवाह हे सतनामी मन अपन स्वाभिमान संग कभू समझौता नइ करिन।

जैसेः-

‘‘छत्तीसगढ़ के स्वाभिमानी राजा, गुरु बालकदास गोसाई ।
सतनामियत ल बचाये खातिर, बबा कतको लड़े लड़ाई।।’’
( छत्तीसगढ़ के स्वाभिमानी राजा)
4.जांगड़े जी के अधिकतर कविता हा अंधविश्वास, रूढीवाद, भेदभाव बिरोध मा लिखथे।

जैसेः-

“तियार रहव सतनामी मन, आगे अठारह दिसम्बर।
अंधविश्वास, रूढ़ीवादी, अउ छोड़व जम्मो आडम्बर ।।’’

Additional information

Dimensions 5 × 8 cm

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