DOGGY AUR DADDY, By(Manoj Sharma Angar)

110.00

मान्यवर आप जो भी रचना संग्रह डॉगी और डैडी को पढ रहें हैं । सबको मेरा मेरा प्रणाम वंदन अभिनन्दन । आप इस रचना संग्रह को पढ़कर मुझे मेरी कमियाँ गलतियाँ बताएँ जिससे मैं अपने लेखन में सुधार कर सकूँ । मैं साहित्य के विषय में ज्यादा नहीं जानता, ना ही मेरी व्याकरण अच्छी है मात्राओं की गलतियाँ मैं अक्सर करता हूँ । मैंने अभी तक जो कुछ लिखा है वह मेरी भावनाएँ है मेरे दिल मे हृदय में जो भाव उठे उन्हें शब्दो का रूप दे दिया है । मेरी ज्यादातर रचनाएँ अपने आसपास के माहौल से संबंधित होती है, वो रचना फ़िर चाहे भिखारी हो या मुझे ज़ीने का दीजिये अधिकार शहीद की बहना हो या गौधरा कांड, दिवाना हो या स्ट्रगलर, भूकंप हो या राजकुमार या हमारे रतलाम शहर के बंद उधोग जगत पर लिखी रचना सज्जन करता था राज शहर पर, या मेरे लिखे और मेरे निर्देशन में मंचन किये नाटक जीवन संघर्ष, माधुरी की शादी, गगन मगन, बेटी, भेरू, एड्स से डरना नहीं समझना होगा, सब में कहीं ना कहीं समाज की बात होती है । आशा करता हूँ । आपको डॉगी और डैडी पसंद आये ।

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355359056
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years And Up
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

“मैं मनोज शर्मा अंगार साधारण सा आदमी और साधारण सी मेरी सोच । मुझे तकलीफ़ होती है प्राणी मात्र का दर्द देख कर वो फिर इनसान हो या सड़क पर घुमने वाला कोई भी जीवात्मा । मुझे तकलीफ़ होती है मजदूरों का शोषण होते देख कर । मुझे तकलीफ़ होती है महिलाओं पर होंने वाले अत्याचार के बारें मे सुन कर । मुझे तकलीफ़ होती है बुजुर्ग माता पिता को पेट भरने के लिये सड़क पर भिख मांगते देख कर जब दो रोटी के लिये बुजुर्गो गालियां सुनते देखता हूँ कितने ही ऐसे लोग हैं है जीनका जीवन एशो आराम का था । मगर अपनी जमीन जायदाद बच्चो के नाम करनें के बाद पेट भर रोटी के लीये सड़क पर भिख मांगनी पड़ गयी।
मुझे तकलीफ़ होती है बहन बेटियों के साथ होने वाली घटनाओं के समाचार पढता सुनता हूँ। मुझे तकलीफ़ होती है जब लोग बेजुबां जानवरों पर अत्याचार करतें हैं । और ऐसी ही तकलीफ होंने के बाद अलग अलग समय में अलग-अलग विचार मेंरे मन में दिमाग में आये और उन विचारों ने शब्दो का रूप लिया तो कोई कविता कोई कहानी और कोई नाटक लिख लिया । जीवन् संघर्ष, माधुरी की शादी, मुझे जीने का दीजीये अधिकार, भिखारी, गोधरा कांड, भूकंप, डॉगी और डैडी, बेटी, ऐसी ही कहानी कविता है । जो पुस्तक डॉगी और डैडी के रूप में आपके सामने है ।
धन्यवाद ।
मनोज शर्मा अंगार”

Additional information

Dimensions 5 × 8 cm

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