Kahaan Hai Pramaan? : Nav Yug Avataran Ke. by (Narayan Prasad Ranade)

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“समाज का नेतृत्व करने वाले कथित मनीषा के पतन से देश सभ्यता, संस्कृति का पतन भी हुआ। प्रत्येक क्षेत्रो में भ्रष्टाचार, कामचोरी, लोभ, मोह, लालच स्वार्थ की जड़े मजबूत होती चली गई। इन सबका प्रभाव न केवल धर्मक्षेत्र वरन सामाजिक, आर्थिक, नैतिक, राजनैतिक, शासकीय, कार्यों, परम्पराओं, प्रक्रियाओं में भी पड़ा है। जहाँ तक नजरे जाती है, जो भी सुनने-देखने में आता है, वहाँ ही भ्रष्टाचार का नंगा नाच दिखाई दे रहा है। न जाने, गति यही
बनी रही तो, देश की सभ्यता, संस्कृति, समाज, की क्या दुर्गति होगी? केवल कल्पना मात्र से दिल दहल जाना स्वाभाविक संवेदना का आधार बनता है। विचार की बात यह है, कि पहिले जैसे धर्म कर्म काण्डों का तांता लगाही रहता है। वर्ष का कोई माह या दिन ऐसा नहीं जो धर्म चेतना के किसी न किसी आयोजन से वंचित हो। प्राय: समाज का आधा समय और 30% कमाई केवल धार्मिक क्षेत्र के क्रिया, कर्म काण्ड ही निगल जाते है। इसके बावजूद भी धर्म का पतन क्यों? यही बात विचारणीय है, चिन्तनीय है, आवश्यक सुधारात्मक दायित्वों के निर्वहन की है।

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing (03 August 2022)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎ 102 pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355354549
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

“नाम- नारायण प्रसाद रानाडे
जन्म – 18.08.1945
जन्मस्थान – ग्राम मन्टी जिला बरघाट, सिवनी (म.प्र.)
शिक्षा – एम.ए.हिन्दी, डिप्लोमा इन टीचिंग, पी.एच.डी. स्कालर
माता – स्व. सूमादेवी
पिता – स्व. खेमराज जी
संप्रति – शासकीय सेवा शिक्षक केवल 7 वर्ष 1969 से 1977 तक, 1971 में.
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य, परम पूज्य गुरुदेव से दीक्षा वालाघाट 108 कुण्डीय गायत्री यज्ञ में, तब से सतत विभिन्न स्तर के सभी साधनाओ, शिविरों में भागीदारी । 1977 में गुरुदेव के आव्हान पर शासकीय सेवा से त्याग पत्र देकर स्थायी रूप से शांतिकुंज हरिद्वार में मिशन की सेवा में रत । पत्रिका संपादन, लेखन, कार्यालयीन दायित्व, आवास व्यवस्था, टोलयों के कार्यक्रमों में जाना, शिक्षण, प्रशिक्षण आदि सेवा में समर्पित । पावन अश्वमेघों की श्रृंखला में 12 स्थानों के अश्वमेघों में सेवा का अवसर प्राप्त । वर्ष 2000 से वर्ष 2009 तक पूर्णकालिक मौन, ताप, साधना के साथ चान्द्रायण आदि व्रतों का पालन । वर्ष 2009 के बाद से देश के अधिकांश जोन, उपजों में शांतिकुंज के निर्देशानुसार सेवा कार्य किया जा रहा है ।

Additional information

Dimensions 5.2 × 8.2 cm

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