Kuchh Nahin To Buddhijivi Ban Jaiye by (Navodit)

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पत्रकार जब व्यंग्य करता है तो उसका अंदाज़ अलग होता है. पत्रकार की पैनी नज़र से जब व्यंग्य निकलता है तो बहुत चुटीला होता है. पत्रकार जब सीधे सीधे समाचार लिखने की शैली को व्यंग्यात्मक करता है तो बहुत मजा आता है. वरिष्ठ पत्रकार नवोदित का यह व्यंग्य संग्रह – ‘ कुछ नहीं तो बुद्धिजीवी बन जाइए ‘ इस सब का सबूत है. उनके व्यंग्य राजनीति और समाज की विसंगतियों बहुत गहरी मार करते हैं. इस व्यंग्य संग्रह में नवोदित के छोटे बड़े. 32 व्यंग्य हैं. कुछ तो व्यंग्य कथाएं हैं. व्यंग्य की खूबी यही है कि वह झकझोरता भी है और गुदगुदाता भी है. नवोदित के व्यंग्य वाक़ई ऐसा करते हैं. पढ़ कर देखिये….

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing (10 August 2022)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎ 131 pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355354662
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

“पुस्तक ‘ कुछ नहीं तो बुद्धिजीवी बन जाइए ‘ के लेखक नवोदित वरिष्ठ पत्रकार हैं. 35 साल पत्रकारिता की है. कई पत्र पत्रिकाओं में विभिन्न पदों पर रहे. 2015 में राष्ट्रीय सहारा के सम्पादक पद से रिटायर हुए .
1981 में रामपुर से दिल्ली आकर पत्रकारिता में उतरने से पहले वह कहानी कविता लिखा करते थे. पर 1981 से 2015 तक उन्होंने कविता कहानी को ताक पर रखकर सिर्फ़ पत्रकारिता की. हां,व्यंग्य उनसे नहीं छूटा,बल्कि और निखरा. पत्रकारिता ने व्यंग्य के बहुत से विषय उपलब्ध कराये.
वह दिल्ली में ही रहते हैं और स्वतन्त्र लेखन करते हैं. यह उनकी 11 वीं लेकिन व्यंग्य की पहली पुस्तक है. उनकी दो पुस्तकें पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर और एक रामनाथ कोविद पर है. उन्होंने एक सूफ़ी संत ‘ हुज़ूर साहब ‘ की जीवनी भी लिखी है. उनकी 2014 के लोकसभा चुनावों पर लिखी पुस्तक, ‘ सत्ता संघर्ष: इतिहास रचता लोकतन्त्र ‘ बहुत जानकारियां उपलब्ध कराती है. बाक़ी किताबें भी सामाजिक व राजनीतिक विषयों पर हैं.
नवोदित का एक कविता संग्रह ‘ आवाजों के रंग ‘ और एक कहानी संग्रह ‘ आस ‘भी प्रकाशित हो चुका है.”

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Dimensions 5 × 8 cm

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