Madhubrat-Gunjan : Svarachit Kavy Sangrah by (Dr. Om Prakash Mishra ‘Madhubrat’)

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“अंतर्मन की पीड़ा का वहिर्जगत् की पीड़ा से तादात्म्य होते ही अभिव्यक्ति की आकुलता कवि हृदय में जाग पड़ती है ।
इसी व्याकुलता में प्रकृति के अनुपम चितेरे कविवर सुमित्रानंदन पंत जी ने लिखा था, वियोगी होगा पहला कवि,
आह से उपजा होगा गान ।
उमड़ कर आँखों से चुपचाप,
बही होगी कविता अनजान ।।
अस्तु किं बहुना मधुब्रत-गुंजन
काव्य संग्रह भी कुछ ऐसी ही व्याकुलता तड़प और छटपटाहट को स्वानभूति से ऊपर उठकर परानुभूति के धरातल पर अभिव्यक्त स्वर हैं ।
इसमें चाहे वंदन अभ्यर्चना के स्वर हों,चाहे अतुकांत कविता हो,या गीत, मुक्तक, या फिर छंद, हाइकू आदि का वैविध्य सभी में मधुब्रत गुंजन की सुख-दुख भरी विविधता की अभिव्यक्ति हुई है ।
मधुब्रत मन जिस स्वाभाविक भाव-तरंग में गुंजित हुआ है–वही तो हैं ये । समर्पित हैं–सुधी पाठकों और विद्वान मनीषियों एवं साहित्यकारों को, सहृदय प्रेमियों को,इस आशय से कि –
जे पर भणिति सुनत हरसाहीं ।
ते नरवर थोरे जग माहीं ।।

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing (07 September 2022)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎159 pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789391046842
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Dimensions 5 × 8 cm

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