Manpakhi by Shilpi Singh

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मैं, इस पुस्तक को अपने पाठकों के साथ साझा करते हुए बहुत उत्साहित हूँ। ये कविताएँ, मेरे जीवन के विभिन्न विचारों, भावनाओं और अनुभवों को दर्शाती हैं।
मेरी प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर, मध्य प्रदेश से पूर्ण हुई । आगरा विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान से परास्नातक किया। मेरे बाल मन-मस्तिष्क में एक शिक्षक बनने की ललक एवं उत्कंठा प्रारंभ से बनी हुई थी । जिस कारण मैंने, विवाहोपरांत, शिक्षण कार्य हेतु बीटीसी की ट्रेनिंग पूर्ण किया और संप्रति में बेसिक शिक्षा विभाग के तहत प्राथमिक विद्यालय जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश में डिबाई तहसील में शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ ।
इस पुस्तक को पूर्णता प्रदान करने में मेरी मदद के लिए मैं, सभी लोगों की आभारी हूँ। विशेष रूप से, मैं, अपने जीवनसाथी को धन्यवाद देना चाहती हूं, जिन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया है।
मेरी प्रथम पुस्तक “साहब” तथा दूसरी पुस्तक “वजह तुम हो” ये दोनों ही पुस्तकें श्रृंगार व विरह पर आधारित एकल काव्य पुस्तक हैं इन दोनों पुस्तकों की अपार सफलता के पश्चात मेरी यह तीसरी पुस्तक “मनपाखी” आपके बीच उपलब्ध है। मैं आशा करती हूं कि ये कविताएँ आपके दिल को छुएंगी।
“आप सभी के प्यार व स्नेह की आकांक्षी”
शिल्पी सिंह…
बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : Hindi
  • Page : 152
  • Size : 5.5×8.5
  • ISBN-13 ‏ : ‎9789358239751
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years 
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Additional information

Dimensions 5.5 × 8.5 cm

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