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Naari Chetna Shankhnaad

मेरी पहली पुस्तक ‘‘अछूत चेतना शंखनाद‘‘ को आपने सराहा। सहृदय लगाया। संभवतः आप पाठक गण पुस्तक को पढ़कर अपने एवं आस-पास फैले ‘अछूत‘ नामक बीमारी को दूर करने का प्रयास करेंगे। स्वयं के चैतन्य शील हृदय में चेतना का संचार कर परिवार, समाज में कुरितियों के बदलाव करने के लिए अनहद नाद-शंखनाद करेंगे।
पुनः आपके बीच मैं रवीन्द्र श्रृंखला कड़ी से एक और शंखनाद लेके आया हू-‘‘नारी चेतना शंखनाद‘‘।
ब्रह्मा की सृष्टि के अनुपम कृति ‘नारी’ जिसे औरत, महिला एवं स्त्री के नाम से जानते हैं।
अनादिकाल से स्त्री रूप पूजित भगवती दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती आदि शक्तियों का स्थान पुरुष देवताओं से सर्वोपरि रहा है। हर पुरुष के जीवन सफलता के पीछे एक नारी का स्थान होता है। जैसे- श्री राम के हाथों रावण का मरण तभी संभव था जब सीता रावण के हाथों अपहरण होती। नरकासुर का वध तभी संभव था जब सत्यभामा श्री कृष्ण के साथ थी। स्वयं शिव की रक्षा के लिए विष्णु ने मोहिनी रुप धरा जो एक नारी थी। इसी तरह हमारे मानव समाज में युगों युगों से नारी का सम्मान किया जाता है। नारी की पूजा की जाती है।
इसी के विपरीत आज नारी का मान-सम्मान घटा जा रहा है। आज आधी आबादी का दर्जा प्राप्त कर भी नारी पुरुषों के द्वारा शोषित है।आज नारी शोषण का रूप भिन्न-भिन्न प्रकार से है।यथा-भ्रूण हत्या, बालिका हत्या, डायन प्रथा, दहेज प्रथा वगैरह।

  • Paperback: 86Pages
  • Publisher: Booksclinic Publishing
  • Language: Hindi
  • Edition: 1
  • ISBN: 9789388277020
  • Release Date: 24 September 2018

150.00 99.00

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Book Details

Dimensions 5 × 8 cm

About The Author

Ravindra prasad

कहते हैं जहाँ न पहुंचे रवि वहाँ पहुँचे कवि। यह चिरंतन सत्य है। जिस ब्रह्म तक पहुंचने के लिए बड़े-बड़े ऋषि -महर्षि,साधु-संत कठिन तपस्या करते रह जाते हैं, वहीं कवि सहज कल्पना कल्पित-भाव से पहुँच जाते हैं।
आज मुझे एक ऐसे ही कवि, लेखक, साहित्यकार, शिक्षाविद्य, अध्यात्म पुरुष का जीवन परिचय लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वे हैं मेरे परम पूज्य पिता श्री इस रवि का इन्द्र- रवीन्द्र।
श्री प्रसाद का जन्म 01 जून 1961 को हुआ। इनके बाल्यकाल में ही इनकी माता सुमित्रा देवी स्वर्ग पधार गई। परम पूज्या दादी स्वर्गीय कविलास देवी के लालन-पालन एवं स्नेह-प्यार और पूज्य दादा स्वर्गीय बलदेव सहाय इनके पोषक बने।
इनकी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय कृत मध्य विद्यालय पत्थलगड्डा से पूरी हुई। जहाँ इनके पिता श्री अर्जुन प्रसाद प्रधानाध्यापक थे।

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