Rahabar : Hindi Gajal by Dr. Kailash Sachan “Prakhar”

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अभी कुछ समय पूर्व मेरी तृतीय प्रकाशित कृति “मेरे मुक्तक मेरी आवाज” के माध्यम से आप लोगों से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था । पाठकों के स्नेह व आशीर्वाद के कारण मुझे पुन: आप लोगों से अपने गजल संग्रह रहबर के माध्यम से जुड़ने का अवसर मिल रहा है | शीर्षक में रचना के भाव का आत्मबोध छुपा होता है । रहबर का शाव्दिक अर्थ राह दिखाने वाला (पथ प्रदर्शक) है । आज के वर्तमान परिवेश मे हिंदी साहित्य की गीत विधा मे असीमित परिवर्तन देखने को मिलते हैं । हिंदी गजल भी उसी का एक रूप है । गजल का उद्भव अरबी साहित्य की गीत विधा से हुआ है । धीरे धीरे फारसी उर्दू भाषाओं से होते हुए आज हिंदी में भी अपनी पैठ बना ली है । आज की गजल सिर्फ रूप सौन्दर्य या इश्को मिजाज पर केन्द्रित न हो कर हमारे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को भी उछाल रही है । आशा है मेरी कृति रहबर इस परिपाटी का निर्वहन करेगी । समाज में जो भी घटित होता है उसका प्रभाव तत्कालीन साहित्य पर अवश्य पड़ता है । मेरी भी लेखनी इससे अछूती नही रही है । रहबर में समाहित मेरे भाव व विचार मेरे अपने, काल्पनिक एवं परिष्थिति जन्य हैं । संयोग से यदि इनमें किसी का भी जीवन परिलक्षित होता हो तो उसके लिये मैं क्षमा प्रार्थी हूं । मुझे विश्वास हैं कि रहबर हिन्दी गजल संग्रह पाठकों को अवश्य पसंद आयेगा ।
सादर
डॉ. कैलाश सचान “प्रखर”

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : Hindi
  • Page : 216
  • Size : 5.5×8.5
  • ISBN-13 ‏ : ‎9789358233322
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years 
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

सभी को नमस्कार ,
मेरी द्रष्टि में अपना परिचय स्वयम को देना बहुत कठिन कार्य है फिर भी प्रकाशक की आवश्यकता हेतु मै अनचाहे मन से कुछ अपने बारे में लिख रहा हूँ | मैं डॉ.कैलाश सचान उपनाम “प्रखर” भारत सरकार की नवरत्न कम्पनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लि. झाँसी से वरिष्ठ कार्यपालक/वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी के पद से सेवा निवर्त्त हूँ | भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स की राजभाषा गृह पत्रिका सृजन का एक लम्बे अरसे तक सफल सम्पादन किया है | हिंदी में लेखन की रूचि प्रारम्भ या यूं कहें क्लास आठवीं से ही रही है | फलस्वरूप हिंदी कविता में ही सेवा के दौरान पीएच.डी.उपाधि हासिल की | द्रष्टि ,स्पंदन , मेंरे मुक्तक मेरी आवाज मेरी प्रकाशित पुस्तकों के बाद रहबर हिंदी गजल संग्रह प्रकाशित होने जा रहा है | मन के शव्द, अंतर्वेदना, सफलता की राह आदि मेरी अप्रकाशित कृतियां हैं। एन.जी.ओ.सर्वोदय सेवा संस्थान के अध्यक्ष पद के साथ भाषा विज्ञानं केंद्र का निदेशक रहते हुए अपने परिवार एवं समाज की सेवा में योगदान दे रहा हूँ | आशा है पाठकों का स्नेह मेरी कृतियों व मुझको सदैव मिलता रहेगा।
सादर
डॉ. कैलाश सचान “प्रखर”

Additional information

Dimensions 5.5 × 8.5 cm

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