Ramarajy, Sushaasan, By(Narayan Prasad Ranade)

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राम राज्य एक व्यावहारिक जीवन का कर्म निष्ठ दायित्व है। जो जन जन से क्रियान्वित किया जाए। लेकिन भगवान श्री राम राज्य के बाद अब तक केवल विचार चिन्तन जय घोष नारे कल्पना ही सुनने में आ रहा है। राम राज्य इसीलिए व्यवहार से गायब है। जबकि राम राज्य व्यवहारिक धारणा क्रिया पालन करने का कर्त्तव्य है। इसके अलावा कोरी कल्पना से हथेली में राई नही उगाई जा सकती हैं।

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355359032
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years And Up
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

“लेखक – संम्प्रति
नाम -नारायण प्रसाद रानाडे
जन्म -18.08.1945
जन्म स्थान- ग्राम मन्ढी, पो. बरघाट, जिला सिवनी (म.प्र.)
शिक्षा – एम.ए. हिन्दी, डिप्लोमा इन टीचिंग, पी.एच.डी. स्कालर
माता – स्व. सूमादेवी
पिता – स्व. खेमराज
संम्प्रति- शासकीय सेवा शिक्षण कार्य प्रारंभिक 7 वर्ष, 1969 से 1977 तक। गुरूदीक्षा 1971 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य परम पूज्य गुरूदेव से बालाघाट के 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में। तब से सतत् विभिन्न स्तर के सभी साधनाओं, शिविरों में भागीदारी, 1977 में पूज्य गुरूदेव के आव्हान पर शासकीय सेवा से त्याग पत्र देकर स्थायी रूप से शान्तिकुंज चला गया। तब से लेकर अब तक सतत् दिये गये स्थान कार्य, कर्तव्य पूर्वक रत रहा। कार्यालयीन दायित्व, लेखन, पात्रिका सम्पादन, आवास व्यवस्था, टोलियों के कार्यक्रम, पूज्य गुरूदेव द्वारा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रमों की श्रृंखला, दायित्व, शिक्षण, प्रशिक्षण आदि मिली जिम्मेदारियां का समर्पित भाव से निर्वाहित। पावन अश्वमेघों की श्रृंखला में 12 स्थानों के अश्वमेघों में सेवा का सुअवसर प्राप्त। वर्ष 2000 से 2009 तक पूर्ण कालिक मौन व्रत, विभिन्न कठोर तप, साधना, चान्द्रायण साधना व्रतों का पालन। वर्ष 2009 के बाद से देश के अधिकांश जोनों, उपजोनों में शान्तिकुंज के निर्देशानुसार सेवा कार्य किया जाना।

Additional information

Dimensions 5.2 × 8.2 cm

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