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Naari Chetna Shankhnaad
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Hindi Books

Naari Chetna Shankhnaad

By Ravindra Prasad

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"नारी चेतना शंखनाद" प्रतिष्ठित साहित्यकार रविन्द्र प्रसाद की एक प्रेरणादायी काव्यकृति है, जो नारी के सम्मान, शक्ति, संघर्ष, त्याग, मातृत्व और सामाजिक योगदान को समर्पित है। यह पुस्तक केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि नारी जागरण का एक सशक्त उद्घोष है। पुस्तक में कवि ने नारी को अबला नहीं, बल्कि सृजन, शक्ति, करुणा और परिवर्तन की प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। इस काव्य-संग्रह की रचनाएँ समाज में व्याप्त रूढ़ियों, भेदभाव और अन्याय पर प्रश्न उठाते हुए नारी के आत्मसम्मान और अधिकारों की वकालत करती हैं। "तू धन्य हो नारी", "क्या मैं हूँ अबला नारी", "अबलाओं की शक्ति", "मातृशक्ति", "भारत की महिला हम" तथा "नारी की दुःखभरी कहानी" जैसी कविताएँ पाठकों को नारी के वास्तविक स्वरूप और उसकी अनंत संभावनाओं से परिचित कराती हैं। लेखक का मानना है कि नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। यह पुस्तक पाठकों को नारी के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और समानता का संदेश देती है तथा एक न्यायपूर्ण और जागरूक समाज के निर्माण की प्रेरणा प्रदान करती है। "नारी चेतना शंखनाद" हर उस पाठक के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है जो नारी शक्ति, सामाजिक परिवर्तन और मानवीय मूल्यों को साहित्य के माध्यम से समझना चाहता है।

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Book Details
Format: Paperback & E-Book
Pages: 86
Size: 5X8
Category: Hindi Books
Author: Ravindra Prasad
ISBN: 978-93-88277-02-0
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