Roopkund , Mrutyucha na ulgadlela koda BY (Omkar Ravindra Joshi)

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is a work of fiction and fantasy in marathi and is based on the folklore from the Himalayan region and stories about Nanda devi Raj jaat yatra

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎ 149  pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎    9789390871100
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

“रुपकुंड

मै खड़ा शांत निश्चल हूँ |
क्यूँ सुन्न शून्य सा मौन हूँ |
ऊँची पर्बत की शिखरों सा,
क्यूँ निःशब्द अचल स्तब्ध हूँ |

हिम की वर्षा हो रही,
सामने योगी हिमालय है |
गर्भ में है ऊर्जा उष्ण सी,
ये कंकालों का कुंड़ है |

शांतता बसती यहाँ,
लेकर अंदर आग है |
मृत्यु का वह साक्षी,
शापित दग्ध कुंड़ है |

है कई गहरे राज़ यहाँ,
मिट्टी का कणकण है जानता |
पर ओढे़ बर्फ की चादर घनी,
वो कुंड़ इसे है छिपाता |

पर यह चुप्पी भी अजीब है,
इसकी भाषा थोड़ी भिन्न है |
मौन की भाषा जिसको समझे,
वही कुंड़ के समीप है |

पवन हुआ है शांत आज,
कोने में छोटा मंदिर है |
उस घटना की कहानी सुनाता,
सामने नंदा त्रिशूल है |

मैं भी हूँ मौन खड़ा,
सून राहा हूँ पुकार उसकी |
भूतकाल का भेद बताती,
पल पल है शांती जिसकी |

देह की यात्रा हुयई समाप्त,
उसके निशान अभी कायम हैं |
अस्थियों को है सँभाले,
वह धीरगंभीर कुंड़ है |

© ओंकार जोशी”

 

Additional information

Dimensions 5.5 × 8.5 cm

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