Sahity va Janjeevan Me Maharana Pratap, By(Rashtrakavi Dr. Brijesh Singh,Dr. Indranath Singh)

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स्वतन्त्रता समर के महायोद्धा के रूप में राष्ट्रनायक महाराणा प्रताप विगत चार शतक से स्वतन्त्रता सेनानियों के लिए एक प्रेरक नायक के रूप में उभरे तथा वे भारतीय जनमानस के हृदय की अतल गहराई में देवस्वरूप विराजमान हैं। स्वातंत्र्य समर के महायोद्धा के रूप में उन्होंने जो त्याग बलिदान का दृष्टांत प्रस्तुत किया है वह विश्व में अप्रतिम है। डॉ बृजेश सिंह द्वारा लिखित ग्रंथ ” साहित्य व जनजीवन में महाराणा प्रताप ” ग्रंथ में विभिन्न साहित्यकारों द्वारा महाराणा प्रताप पर केन्द्रित प्रणीत साहित्य का शोध प्रविधि पर साहित्यिक मूल्यांकन व विवेच्यपूर्ण समीक्षा की गई है वह विशेषोल्लेखनीय है। सैकड़ो वर्ष से महाराणा प्रताप पर केंद्रित विभिन्न विधाओं में प्रशस्त साहित्य का प्रणयन होते आ रहा है परन्तु कालचक्र के प्रभाव में अनेकानेक महत्वपूर्ण पुस्तकें विलुप्त हो चुकी हैं या विलोपन के कगार पर हैं। डॉ.बृजेश सिंह के द्वारा तमाम उन साहित्य का संकलन व उस पर शोधपरक समीक्षा ग्रंथ का प्रकाशन जहाँ राष्ट्रीय चेतना के प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है वहीं उन तमाम लेखकों के प्रति श्रद्धा समर्पण का भाव सराहनीय है। सैकडो वर्ष से विभिन्न साहित्यकारों द्वारा महाराणा प्रताप को एक महान योद्धा के रूप में उनके शौर्य, त्याग , बलिदान को रेखांकित किया गया है। डॉ.बृजेश सिंह द्वारा महाराणा प्रताप को महाबलिदानी, महाप्रतापी के साथ-साथ एक सफल राजा व कुशल प्रशासक के स्वरूप पर गहन शोध कर सफलतापूर्वक उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का प्रभावी रेखांकन किया गया है। सामान्यतौर पर महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी युद्ध के बाद अत्यन्त विपन्न स्थिति में घास की रोटी खाने की बात समाज में प्रचलित की गई है इस संदर्भ में डॉ.बृजेश सिंह ने गहन शोध कर इस मान्यता का खण्डन किया है तथा उनका तर्क है कि हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात् मेवाड़ का अधिकांश भूभाग तथा अनेक किले महाराणा प्रताप के आधिपत्य में थे साथ ही सम्पूर्ण मेवाड़ की जनता महाराणा प्रताप के साथ खड़ी थी। अत: उनके परिवार को खाने की व्यवस्था न हो पाने की बात गले से नहीं उतरती। इसके बावजूद लोककथाओं के अनेकानेक प्रसंगों को इस ग्रंथ में डॉ.बृजेश सिंह ने स्थान दिया है, यद्यपि वे इतिहास सम्मत नहीं हैं परन्तु महाराणा प्रताप के त्याग बलिदान को रेखांकित करते हैं।

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355359223
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years And Up
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Dimensions 5.5 × 8.5 cm

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