Santan Nishtha Karm Yogi : The tale of a couple,who sacrificed their life for their children by (Abhishek Shukla)

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This book is rich assortment of motivation and highly influential traits for achieving success in one’s life if one has insight and an inclination to learn from live life sketches of two persons,who happen to be parents of author.By way of analysis of their struggle ,their battle with odds and how they converted all odds in their favor is very lively account The author highlights their such qualities which should be imbibed by everyone for grooming one’s personality.viz no body can underrate importance of hard work,proper decisions in difficult situations and foresightedness while setting the goals of life.The value of love and affection to younger ones and deep respect with simplicity to all relatives and friends can ba learnt from them.The book is soaked in stream of unbiased love of various family members reflected in memoirs of such family members.All said and done,the book is more then a simple tribute book and may be used as light house by those in search of inspiration ,those who are feeling dis illusioned and those who are finding journey too difficult to be made

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing (19 November 2022)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎ 149 pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355354983
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

” लेखक/सम्पादक श्री अभिषेक शुक्ला ने इस पुस्तक में अपने माँ-पिताजी को श्रद्धान्जलि देने के साथ-साथ उनके ऐसे गुणो का वर्णन किया है जो पाठकों को अपने जीवन में आगे बढने के लिये पथ प्रदर्शक का काम कर सकते है। साथ ही बहुत से
रिश्तेदारों के रोचक प्रसंगों का भी समावेश किया है,जिन्हें पढते-पढते पाठक को जानकारियां और मनोरंजन दोनों प्राप्त होंगे लेखक अभिषेक शुक्ला 1980 में आयकर विभाग इंदौर में नियुक्त हुए और शीघ्र ही जबलपुर आ गये। फिर आयकर अधिकारी विदिशा,देवास और भोपाल में पदस्थ हुए। सहायक आयकर आयुक्त पद पर वर्ष 2002 से 2007 तक रायपुर,भिलाई और पुणे (महाराष्ट्र)में सेवायें दी। वर्ष 2011 से संयुक्त आयकर आयुक्त और वर्ष 2014 से अपर आयकर आयुक्त के रूप में जबलपुर में पदस्थ रहे। वर्ष 2015 में सेवा निवृति के पश्चात सम्प्रति इंदौर में परिवार सहित निवासरत हैं।
लेखक की हिन्दी साहित्य सृजन में बाल्यकाल से ही रुचि रही है।1974-75 में वे इंदौर के प्रतिष्ठित गुजराती कालेज की
साहित्यिक पत्रिका के प्रधान सम्पादक रहे। आयकर वि भाग में भी राजभाषा कार्यान्वयन के लिये प्रयासरत रहे और अनेक पुरस्कारों से नवाजे गये । उनके लेख, कविताएं ,व्यंग्य आदि समय समय पर दैनिक नवभारत रायपुर और नईदुनिया इंदौर में प्रकाशित हुए हैं।आप Face book पर भी ब्लॉगर के रूप में अपनी सटीक टिप्पणियां, कविताएंऔर आलेख देते रहते हैं। you -tube पर कवि सम्मेलनों में भी आपकी सक्रिय भागीदारी रहती हैं।
उनके साथ- साथ परिवार के सदस्यों भाई सतीश,जितेन्द्र और बहन अनीता की सक्रिय उत्साहवर्धक भूमि का रही। कम्पटुर टाइपिगं का उनके पत्रु अक्षत,बहू ऋचा और बेटी आस्था ने सम्भाला।

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Dimensions 6 × 9 cm

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