Shrilanka Mein Bauddh Dharm by Anand Prakash Gupta

150.00

“आनन्द प्रकाश गुप्ता जी (Anand Prakash Gupta) ने अपनी पैनी दृष्टि से भगवान बुद्ध के जीवन चरित और उनकी शिक्षाओं से अपने लेखकीय जीवन का ई. सन 2008 से प्रारम्भ किया है। बौद्ध ज्ञान,दर्शन पर उनकी दो पुस्तकें ‘बोधिसत्व (एक पुररावलोकन)’ तथा ‘धम्मं शरणं’ पाठकों में अत्यन्त लोकप्रिय हैं। इन दोनों ही पुस्तकों के मराठी एवं अंग्रेजी भाषा में भी अनुवाद हो चुके हैं। बौद्ध आख्यान के अतिरिक्त लेखक ने कथा, आलेख एवं यात्रा संस्मरण के द्वारा ‘मन्दाकिनी तीरे’ एवं ‘उत्तराखंड चार धाम यात्रा’ नामक पुस्तकों के माध्यम से हिन्दी साहित्य जगत को उत्कृष्टता प्रदान की है।
प्रस्तुत पुस्तक “”श्रीलंका में बौद्धधर्म”” लेखक द्वारा अपनी श्रीलंका की यात्रा के उपलक्ष में लिखी गयी है। पुस्तक में निहित विषय पूर्णतया बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के सम्बन्ध में हैं। भगवान बुद्ध के लगभग 500 वर्ष बाद बौद्ध धर्म भारत वर्ष के बाहर उत्तर-पूर्व के देशों (द्वीपों) में बौद्ध श्रमणों एवं विद्धान प्रचारकों के माध्यम से प्रसारित हुआ। श्रीलंका द्वीप में यह धर्म सम्राट अशोक के ज्येष्ठ पुत्र एवं पुत्री स्थविर महेन्द्र एवं थेरी संघमित्रा के माध्यम से पहुँचा और फिर यह वहाँ का राष्ट्रधर्म बन गया। स्थविर महेन्द्र, थेरी संघमित्रा तथा श्रीलंका के राजा ‘देवानां पिय तिस्स’ ने धम्म के प्रचार और श्रद्धार्पण में अपना सम्पूर्ण जीवन उत्सर्ग कर दिया। आज लगभग 2100 वर्ष के बाद उनके द्वारा स्थापित बौद्धमठ, स्तूप और मंदिरों के स्थापत्य अवशेष श्रीलंका में देखे जा सकते हैं। भगवान बुद्ध के मूल ज्ञान को श्रीलंका के जन-जन ने अपने आचरण में उतारा है। श्रीलंका जन – जन के मन में भारत वर्ष,भगवान बुद्ध,सम्राट अशोक, स्थविर महेन्द्र और थेरी संघमित्रा अपने अवदानों के माध्यम से बसे हुए हैं । पर्यटन की दृष्टि से श्रीलंका में स्थित सभी बौद्ध स्थल सुन्दर दर्शनीय एवं श्रद्धा के केन्द्र हैं । ”

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : Hindi
  • Page :74
  • Size : 5.5×8.5
  • ISBN-13 ‏ : ‎9789358232370
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years 
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Dimensions 5.5 × 8.5 cm

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