Socho jara! insan hain ? : Ek Naitik Evam Vyavaharik Shiksha by Dr. Anita Kurre, Dr. Madan Lal Kurre

300.00

मेरी ये पुस्तक “सोचो जरा ! क्या इंसान हैं ?“ आपके हाथों में है। यह पुस्तक समाज में व्याप्त इंसानों के हिंसक व अमानवीय व्यवहार याने गिरता मानवीय मूल्य की ओर ध्यान आकर्षित कराती है। मेरी ये पुस्तक एक आत्मा की तरह सामने आकर अनैतिक, अमानवीय कृत्य पर आवाज उठाते हुए सवाल पूछती है कि, सोचो जरा ! क्या इंसान हैं ? उन सामान्य पहलुओं को जिसे आज हर इंसान तर्क-वितर्क करके सही-गलत क्या है जानते हैं, समझते हैं, फिर भी नजर अंदाज करते हैं। इसी नजरअंदाज के कारण आज समाज अमानवीय गुणों से भर गया है, वर्तमान में इंसान, इंसान को इंसान नहीं समझते, एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते, अपनें स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक गिर जाते हैं। इंसानों में यह गिरता मानवीय मूल्य, समाज में फैली एैसी विष या जहर है जिसे हर इंसान को मजबूरन पीना पड़ रहा है और मजबूरन जीना भी पड़ रहा है। वो मूल्य जिसके रहने से इंसान में इंसानियत होती है वो खतम हो चुकी है। मेरी ये पुस्तक मैंने हृदय से व अपनी छोटी-सी अनुभव से लिखी है। मेरे द्वारा ये एक प्रयास है कि इंसानों के गिरता हुआ मानवीय मूल्य को कैसे रोका जाए, उनमें कैसे इंसानियत दोबारा पैदा किया जाए। साथ ही मानवतावादी, समानतावादी, वैज्ञानिकवादी, अहिंसावादी महापुरूषों के विचारों की ओर आत्मसात व प्रेरित कराने का प्रयास है

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : Hindi
  • Page : 208
  • Size : 5.5×8.5
  • ISBN-13 ‏ : ‎9789355356710
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years 
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

1 in stock (can be backordered)

SKU: book1414BCP Category:

Additional information

Dimensions 5.5 × 8.5 cm

Reviews

There are no reviews yet.

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.