Sparsh, By(Niranjan Kumar Pandey)

150.00

“श्रद्धावान श्रद्धेय,
विद्वत जन पाठकों समीक्षकों एवम पुस्तक प्रेमियों हृदय के अंतरतल से नमन वंदन व अभिनंदन के साथ ही साथ साग्रह निवेदन पूर्वक मेरी सुबोध सरल सामयिकी रचना स्पर्श माँ वाग्देवी के अनुकंपा से पिता स्वर्गीय चंद्रिका पांडेय के आशीर्वाद एवं माँ स्वर्गीय अन्नपूर्णा पांडेय की प्रेरणा से सहधर्मिणी संजू पांडेय प्रति पालिता अनामिका पांडेय अनन्या एवं अंश के आत्मीय सहयोग से आपके कर कंज में समर्पित।
स्पर्श हमारे अनुभवों एवं समसामयिक घटनाक्रमों प्राकृतिक एवं मानव कृत क्रियाकलापों के साथ-साथ देवी देवताओं की वंदना जिसमें गणेश वंदना माँ दुर्गा वंदना राजस्थान स्थित फलोदी माता निमोदा माता की वंदना के साथ साथ स्वागत गान, विदाई गान, प्राकृतिक परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं एवं मानव कृत विध्वंसो को ध्यान में रखते हुए सत सनातन धर्म से संबंधित पर्व त्योहारों के महत्व प्राकृतिक समसामयिकी यथा कजरी जैसे रसात्मक गीतों के साथ अपनी भाव अभिव्यक्ति को स्पर्श नामक रचना में सहेजने का पुनीत कार्य किया हूँ । मानव मन में उठने वाले पुरुष प्रकृति के आत्मीय स्पर्श से उनके अंतर स्थल में भावनाओं के उठे ज्वार एवं आनंद को समाहित करने का आत्मिक प्रयास किया है। होली दीपावली जैसे त्योहारों की आत्माभिव्यक्ति को रखने का स्तुत्य प्रयास किया गया है । इसे आप जैसे सुधिसमीक्षकों के कर कमलों में प्रस्तुत कर रहा हूँ। इसे समीक्षात्मक मनोरंजनात्मक दृष्टि से स्वीकार करेंगे इसी आत्मविश्वास से अभिभूत आपकी मंगल कामना।
सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चित् दुख भाग भवेत।
परमपिता परमेश्वर एवं जगत जननी मां दुर्गा से प्रार्थना करते हुए लेखनी को विराम देना चाहूँगा । इस रचना को आप स्वीकारेंगे इसी विश्वास के साथ आपका आत्मीय
निरंजन कुमार पांडेय।
ग्राम पोस्ट धेवशा शेखपुरा बिहार।

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing 
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355353382
  • Reading Age ‏ : ‎ 3 Years And Up
  • Country Of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

बिहार प्रांत के शेखपुरा जिला स्थित लोदीपुर पंचायत के प्रकृति की गोद में बसा धेवशा नामक ग्राम में सम्मानित ब्राह्मण परिवार में प्रादुर्भाव हुआ पितामह द्वारिका पांडेय सम्मानित व्यक्तित्व एवं चाचा गंगाधर पांडेय राजनीतिक सम्मान युक्तिसंगत व्यक्ति थे पिता चंद्रिका पांडेय एवं माता धार्मिक विचार संपन्न अन्नपूर्णा पांडेय थी ग्रामीण परिवेश में शिक्षा का आरंभ एवं स्नातक शिक्षा रामाधीन महाविद्यालय शेखपुरा से उच्च शिक्षा स्नातकोत्तर हिंदी संस्कृत में भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर से संपन्न हुआ B.Ed एवं वेट शैक्षणिक डिग्री के साथ बाल्यकाल से ही साहित्य के प्रति आकर्षण के कारण शेखपुरा जिला हिंदी साहित्य परिषद के सचिव पद प्राप्त हुए सामाजिक सरोकार के कारण कई संस्थाओं के अध्यक्ष एवं सचिव पद प्राप्त होते रहे रोटरी क्लब ऑफ शेखपुरा सेंट्रल के अध्यक्ष एवं सचिव भारत विकास परिषद के सचिव नवनियुक्त माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बौद्धिक एवं संपर्क प्रमुख ब्राह्मण एकता मंच शेखपुरा जिला अध्यक्ष जैसे सम्मानित पद प्राप्त होते रहे हैं संप्रति प्राध्यापक पद पर हूँ। साहित्य साधना एवं साहित्यिक अभिरुचि के कारण समर्पण हमारी प्रथम काव्य रचना रही है कविसमूह में युगधर्म युग धारा माहुरी मयंक पंचामृत जैसी काव्य रचनाओं में हमारी उपस्थिति बनी रही है वैसे मैं अपने आप को कवि कहूं मुझ जैसे साहित्य चिंतक के लिए शोभा नहीं देती मैं अपने को कैसे कवि मान लूं महाकवि तुलसीदास जैसे सिद्धहस्त का मै अनुगामी मानते हुए उनके कथन को स्वीकारते हुए कहना चाहूंगा कवित विवेक एक नहीं मोरे। सत्य कहहूं लिखी कागज कोरे ।। पारिवारिक प्रेरणा भी सदा साथ रहा है चिर संगिनी संजू पांडेय प्रतिपालिता अनामिका पांडेय का सहयोग पिता का आशीर्वाद माता की प्रेरणा से यह सुबोध रचना स्पर्श अति नम्र भाव से आप विद्वत के समक्ष वाग्देवी मां सरस्वती की अनुकंपा से प्रस्तुत कर रहा हूँ । इसे आप स्वीकार करेंगे इसी विश्वास के साथ मैं निरंजन कुमार पांडे। ग्राम पोस्ट धेवशा जिला शेखपुरा

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Dimensions 5 × 8 cm

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