Sulagte Arman by (Dr. Vanshidhar Tiwari “Vishwavallabh”)

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“मनुष्य संसार का एक बुद्धिजीवी प्राणी है, परन्तु इसमे भी कुछ प्राकृतिक गुण-दोष होते हैं| खासकर, प्रत्येक मनुष्य में षडविकार अवश्य होते हैं|
काम, क्रोध, मद, लोभ, ईर्ष्या, द्वेष आदि| विशेषकर मैं मद की बात करना चाहता हूँ| मद का अर्थ अहंकार’, घमण्ड, गुमान के अर्थ में लिया जाता है|
किसी को धन का मद, किसी को बल का, किसी को पद का, किसी को श्रैष्ठ जाति-पांति का ईत्यादि|
मद मनुष्य को अंधा बना देता है| वैसे लोग व्यवहारहीन हो जाते हैं, वे दुसरे के प्रेम, श्रद्धा, अरमान, अनुनय-विनय को भी ठुकरा देते हैं, तिरस्कृत कर देते हैं|
यह सामाजिक दोष बहुत काल से चला आ रहा है और आज भी यह सिलसिला जारी है|
इस दुर्व्यवहार का बुरा प्रभाव समाज पर पडता है| कवि, साहित्यकार, का धर्म होता है कि समाज सुधार के लिए लिखे जो लोगों में जागृति पैदा कर सके|
सुलगते अरमान की कहानियाँ ऐसे ही कुछ खट्टे-मीठे अनुभव का एक संकलन है|
आपके जीवन के किसी एक गलत उद्देश्य या मार्ग में परिवर्तन हो जाए तो लेखक की लेखनी धन्य होगी|
वंशीधर

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing (09 August 2022)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎ 160 pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355353849
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Dimensions 5 × 8 cm

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