Samarpan : Bhaavon ka by (Sushila Devi)

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“मेरे अंतर्मन से
जब हमारा अंतर्मन किसी बात को महसूस करता है तो हमारे दिल के किसी कोने में छुपा हुआ कवि अपनी भावनायों को लय बद्ध करता हुआ ऐसी रचनायों को उपजा देता है जिसकी छवि उसके अंतर्मन ने कभी न कभी स्वप्न में तो जरूर सोची होगी।
वास्तव में काव्य उन सभी भावों का तालमेल होता है जो स्वतः ही शब्दों के साथ किसी एक पंक्ति को इस प्रकार लयबद्ध कर देता है जिसको लिखने के बाद पढ़ने में खुद को ही एक ऐसी आन्तरिक खुशी दे देता है कि कलम को नमन करने को बार-बार दिल करता है।
ये सब कविताएं उन्हीं भावों का समर्पण धारण कर एक काव्य-संग्रह का रूप धारण करती है जो मेरी माँ अंबे के निराकार और साकार रूप के आशीर्वाद का प्रतिफल है जिनके आशीर्वाद से मेरी कलम ने उस सरल भाषा की अभिव्यक्ति अपनी रचनायों में दी है जो जन मानस के ह्रदय-पटल पर अंकित होकर उनके अंदर छिपे भावों को भी अभिव्यक्ति प्रदान कर देगी।मेरे काव्य-गुरु के मार्गदर्शन में मुझें इसकी प्रेरणा मिली।
समर्पण(भावों का) मेरा प्रथम काव्य-संग्रह है जो 7 चरणों में विभक्त है।प्रथम में मेरी श्रद्धा के भाव जगजननी माँ के पावन चरण-कमलों से होकर अवतार रूप हुए देवताओं को वन्दन है जिनको सम्पूर्ण ब्रह्मांड किसी न किसी रूप में पूजता है।दूसरा भाग हमारे त्यौहार है जिसमें हम अपने नेक कार्यों से अपनी सभ्यता, संस्कृति को उजागर कर सकते है।तीसरे भाग में मौसम के हर उस रूप को नमन है जो इस भारत देश की भूमि को सबसे अलग व अद्भुत बना देती है।अगला चरण उन दिवसों की महत्ता दिखाता प्रतीत होता है कि किस प्रकार इस समाज में हम इंसान एक-दूसरे से किसी न किसी रूप में जुड़े है।सबका आदर-मान उनकी शान है।क्योंकि यहाँ की धरा को देवों की भूमि कहा जाता है और भारत देश की खूबी यहाँ के रिश्तों की पाक-पवित्रता ही है।उत्तम व्यक्तित्व को भी अपनी रचनायों के माध्यम से दर्शाया गया है यहाँ के लोगों में धामिर्कता ,ज्ञान व आध्यात्मिकता कूट-कूट कर भरी है।
वीरगाथा में अपने देश के जवानों के प्रति अगाध प्रेम व्यक्त हुआ है।भारत-माता के उस शौर्य का भी गुणगान किया है जिसके कारण पूरे विश्व में भारत का डंका बजता है।
प्रकृति तो स्वयं ही एक कविता है इसके तो हर कण-कण में ही संगीत बजता है तो जब इंसान इसकी सुंदरता पर मोहित होता है तो इसका प्रेमी बनने से उसे कोई नही रोक सकता।प्रकृति के रूप में ऐसे ही विचारों की खनक है जो दिलों में प्रकृति से प्रेम के गुणों को उजागर करती है।
इस प्रकार से समर्पण भावों का काव्य-संग्रह उन सभी रूपों को नमन करती है जो इस सृष्टि को चलाने में निस्वार्थ रूप से अपना सब कुछ अर्पण करती है और उन व्यक्तित्व को है जो संसार में इंसान के अंदर छुपी हुई प्रतिभा को अपने गुणों से उजागर कर एकता,भाईचारे व अमन को फैलाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती है।
मेरी कलम से निकले भाव मेरे है पर इसके पीछे मेरी जगजननी माँ अंबे और उनके साकार रूप का आशीष है जो इस काव्य-संग्रह में उजागर होता है।कोटिशः वन्दन माँ को करते हुए काव्य-गुरु को नमन करके अपने परिवार और उन सभी हस्तियों का तह दिल से आभार व्यक्त करती हूं जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस कृति के सृजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है,समय-समय पर अपनी अनमोल शुभकामनायों से मुझें सराबोर किया और मुझें हर बार कुछ नया लिखने की प्रेरणा दी।
बहुत ही सरल भाषा का ये काव्य-संग्रह आपको बहुत पसंद आएगा ऐसी मैं दिल से आशा रखती हूँ और समर्पण मेरे भावों का आपके अंतर्मन पर एक छाप छोड़ देगा जो भविष्य में मुझें नया लिखने की प्रेरणा से सदैव मेरा मार्गदर्शन करेगा।
आप सभी सुधि पाठकों की प्रतिक्रियाओं के इंतजार में……

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing (15 September 2022)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎ 84pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355355928
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Description

“श्रीमती सुशीला देवी
(राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार)
शिक्षा –डी.एड,बी.एड,एम.ए
शिक्षा विभाग- जे.बी.टी.अध्यापिका के पद पर कार्यरत, जिला करनाल राज्य-हरियाणा
अनेक मंचों से राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान,सावित्री बाई फुले सम्मान,राष्ट्र गौरव सम्मान,गुरु चाणक्य सम्मान आदि व अंतरराष्ट्रीय (ग्लोबल बेस्ट एडुकेटर अवार्ड) शिक्षिका का पुरस्कार प्राप्त। अंतरराष्ट्रीय लेखिका व कवयित्री। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान पत्र की प्राप्ति, राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान 2022, राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान 2022 राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड 2022 साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड 2022, 40 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित(राष्ट्रीय स्तर पर), 60+रचनाएँ व 10+ लेख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM), इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है। इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं। जो जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

सम्पर्क-सूत्र
बाला जी कॉलोनी
घरौंडा-132114
करनाल
(हरियाणा)
ई-मेल-sushiladevijmd@gmail.com

Additional information

Dimensions 5 × 8 cm

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