Mangla : Upanyas by (Keshav Shukla)

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“मंगला’ एक ऐसी स्त्री का आख्यान है जो परिवार के प्रबंधन और संरक्षण-संवर्धन के लिए सर्वस्व समर्पण द्वारा स्वत्व का त्याग कर देती है। वह घर-परिवार के दायित्व निर्वाह को केंद्रस्थ करके न अपने स्वप्न को साकार कर पाती है, न ही प्रीति की पावन प्यार को स्वीकार कर पाती है। मंगला जैसा दुर्लभ-दुष्कर, निस्वार्थ-निष्कपट चरित्र आज भी जीवंत हैं इसीलिए संस्कृति संरक्षित है, और घर-परिवार आरक्षित |
मंगला के कोमल-कमनीय कंधों पर उस समय परिवार का बोझ आ जाता है जब उसके भविष्य को सँवारने और सपनों को सहेजने के सुनहले-रुपहले क्षण होते हैं। वह संस्कारी है अतः अभिभावक का आश्रय-ग्रहण करती है। वह पूरी है अत: बिखरने के पहले घर को संजोती है। वह बलिदानी है अत: अभिलाषाओं को कुचल कर सबको समुन्नत करती है। वह आद्यन्त हर पल, हर क्षण महसूस करती है कि वह सबकी है लेकिन उसका कोई नहीं। इस तरह सब गंतव्य की ओर गमन कर जाते हैं। वह ऐसी आश्रयदाता पक्षी है जो सबको पालती-पोषती और पंख देती है। उड़ान की दर्जा पाकर एक-एक करके सब नए नीड़ के अन्वेषण में निकल पड़ते हैं।

  • Publisher ‏ : ‎ Booksclinic Publishing (15 September 2022)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Paperback ‏ : ‎ 67 pages
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789355351982
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Generic Name ‏ : ‎ Book

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Dimensions 5 × 8 cm

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